श्री साईं बाबा की दैनिक आरती
श्री साईं मंदिर झाबुआ में प्रतिदिन प्रातः से रात्रि तक श्रद्धा और भक्ति के साथ साईं बाबा की चार प्रमुख आरतियाँ आयोजित की जाती हैं।
प्रतिदिन होने वाली साईं आरतियाँ
आरती का समय पर्व, मौसम या मंदिर व्यवस्था के अनुसार बदल सकता है।
काकड़ आरती
प्रातः 5:30 बजेबाबा को जगाने और दिन के शुभारंभ की आरती।
मध्याह्न आरती
दोपहर 12:00 बजेदोपहर के समय पूजा और भोग के पश्चात आरती।
धूप आरती
सायं 6:30 बजेसूर्यास्त के समय दीप, धूप और भजन के साथ आरती।
शेज आरती
रात्रि 9:00 बजेमंदिर बंद होने से पहले बाबा की अंतिम आरती।
श्री साईं बाबा की आरतियाँ
नीचे प्रत्येक आरती खोलकर उसका पाठ पढ़ सकते हैं।
प्रातः 5:30 बजे काकड़ आरती +
उठा उठा श्री साईनाथ
उठा उठा श्री साईनाथ गुरु चरण कमल दावा।
आधि व्याधि भवताप वारुनी तारा जड़जीवा॥
गेली तुम्हां सोडुनिया भव तम रजनी विलया।
परी ही अज्ञानासी तुमची भुलवी योगमाया॥
शक्ति न आम्हां यत्किंचितही तिजला साराया।
तुम्हीच तीते सारुनी दावा मुख जन ताराया॥
भो साईनाथ महाराज भवतिमिर नाशक रवी।
अज्ञानी आम्ही किती तुमची वर्णावी थोरवी॥
श्री सच्चिदानंद सद्गुरु साईनाथ महाराज की जय।
दोपहर 12:00 बजे मध्याह्न आरती +
आरती साईं बाबा
आरती साईं बाबा, सौख्यदाता आर जीवा।
चरण रजतली द्यावा, दासा विसावा,
भक्तां विसावा, आरती साईं बाबा॥
जाळुनिया अनंग, स्वस्वरूपी राहे दंग।
मुमुक्षु जना दावी, निज डोळा श्रीरंग॥
जया मनी जैसा भाव, तया तैसा अनुभव।
दाविसी दयाघना, ऐसी तुझी ही माव॥
तुमचे नाम ध्याता, हरे संसृति व्यथा।
अगाध तव करणी, मार्ग दाविसी अनाथा॥
कलियुगी अवतार, सगुण परब्रह्म साचार।
अवतीर्ण झालासे, स्वामी दत्त दिगंबर॥
आठा दिवसा गुरुवारी, भक्त करिती वारी।
प्रभुपद पहावया, भवभय निवारी॥
माझा निज द्रव्य ठेवा, तव चरणरज सेवा।
मागणे हेचि आता, तुम्हा देवाधिदेवा॥
इच्छित दीन चातक, निर्मल तोय निजसुख।
पाजावे माधवा या, सांभाळ आपुली भाक॥
श्री सच्चिदानंद सद्गुरु साईनाथ महाराज की जय।
सायं 6:30 बजे धूप आरती +
आरती साईं बाबा
आरती साईं बाबा, सौख्यदाता आर जीवा।
चरण रजतली द्यावा, दासा विसावा,
भक्तां विसावा, आरती साईं बाबा॥
जाळुनिया अनंग, स्वस्वरूपी राहे दंग।
मुमुक्षु जना दावी, निज डोळा श्रीरंग॥
जया मनी जैसा भाव, तया तैसा अनुभव।
दाविसी दयाघना, ऐसी तुझी ही माव॥
तुमचे नाम ध्याता, हरे संसृति व्यथा।
अगाध तव करणी, मार्ग दाविसी अनाथा॥
कलियुगी अवतार, सगुण परब्रह्म साचार।
अवतीर्ण झालासे, स्वामी दत्त दिगंबर॥
आठा दिवसा गुरुवारी, भक्त करिती वारी।
प्रभुपद पहावया, भवभय निवारी॥
श्री सच्चिदानंद सद्गुरु साईनाथ महाराज की जय।
रात्रि 9:00 बजे शेज आरती +
जय जय साईंनाथ
जय जय साईंनाथ, आता पहुडावे मंदिरी हो।
आळवितो सप्रेमे, तुजला आरती घेऊनी करी हो॥
रंजविसी तू मधुर बोलुनी, माया जैसी निज मुला हो।
भोगिसी व्याधी तूच हरुनिया, निज सेवक दुःखाला हो॥
धावुनिया भक्त व्यसन हरिसी, दर्शन देसी त्याला हो।
झोपेची बेला झाली आता, जाऊ दे आम्हाला हो॥
क्षमा शयन सुंदर ही शोभा, सुमन शेज त्यावरी हो।
घ्यावी थोडी भक्त जनांची, पूजनादि चाकरी हो॥
ओवाळितो पंचप्राण, ज्योती सुमती करी हो।
सेवा किंकर भक्त प्रीती, अत्तर परिमळ वारी हो॥
श्री सच्चिदानंद सद्गुरु साईनाथ महाराज की जय।
विशेष साईं आराधना
प्रत्येक गुरुवार मंदिर में साईं बाबा का विशेष श्रृंगार, पूजा, साईं सत्चरित्र पाठ, भजन, धूप आरती और प्रसादी वितरण किया जाता है।
आरती में सम्मिलित होते समय
समय से पहुँचें
आरती प्रारंभ होने से कम से कम 15 मिनट पहले मंदिर पहुँचें।
शांति बनाए रखें
आरती के दौरान मोबाइल फोन को बंद या साइलेंट रखें।
स्वच्छता रखें
मंदिर परिसर की पवित्रता और स्वच्छता का ध्यान रखें।
प्रसाद ग्रहण करें
आरती के पश्चात श्रद्धापूर्वक साईं प्रसाद ग्रहण करें।
साईं आरती में आपका स्वागत है
श्री साईं बाबा की आरती में सम्मिलित होकर श्रद्धा, सबूरी और बाबा के आशीर्वाद का लाभ प्राप्त करें।
ॐ साईं राम
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